व्यायाम की महता पर निबंध | Essay on Importance of Exercise in Hindi

Essay on Importance of Exercise in Hindi :  इस लेख में हमने  व्यायाम के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की है। यहाँ पर दी गई जानकारी बच्चों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी।

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  व्यायाम के लाभ या स्वास्थ्य और व्यायाम : मानव जीवन में स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। एक स्वस्थ मनुष्य ही जीवन का पूरा आनन्द प्राप्त कर सकता है। यदि मनुष्य का शरीर स्वस्थ नहीं तो उसके लिए धन-सम्पत्ति सब व्यर्थ है । संस्कृत कवि कालिदास ने भी लिखा है कि शरीर ही मानव के सभी कर्मों का साधन है। जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता।

बल्कि किसी भी काम को करने की शक्ति उसके शरीर में नहीं होती। यद्यपि स्वास्थ्य के लिए अच्छे भोजन की आवश्यकता होती है, लेकिन व्यायाम की आवश्यकता तो सबसे बढ़कर है। जो लोग व्यायाम नहीं करते, उनके शरीर अच्छे एवं पौष्टिक भोजन के बावजूद स्वस्थ नहीं रहते। कोई न कोई रोग उनको लगा रहता है ।

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व्यायाम आवश्यक क्यों है? 

 पाँच तत्त्वों से मानव शरीर बना है। ये पाँच तत्त्व है मिट्टी, वायु, पानी, अग्नि और आकाश । ये पाँच तत्त्व प्रकृति के पाँच अंग है। यही पाँच तत्त्व मिलकर मानव शरीर की रचना करते हैं । यदि इन तत्त्वों में तारतम्य रहता है तो मानव शरीर भी स्वस्थ रहता हैं। इनमें से किसी एक तत्त्व की कमी होने पर शरीर अस्वस्थ हो जाता है।

व्यायाम की महता पर निबंध | Essay on Importance of Exercise in Hindi

अतः शरीर को रोगों से बचाने के लिए व्यायाम की आवश्यकता उत्पन्न होती है । प्रायः वन-प्रदेश के पशु-पक्षियों के शरीर निरोग होते हैं । इसका प्रमुख कारण यह है कि वे दिन भर व्यायाम करते हैं । एक शेर को भी अपने शिकार के पीछे मीलों भागना पड़ता है । लेकिन मानव को बैठे-बैठाये भोजन मिल जाता है। व्यायाम न करने से उसे अनेक रोग घेर लेते हैं।

अंग्रेज़ी की एक उक्ति के अनुसार स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है । यदि शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो मस्तिष्क निरोग कैसे रह सकता है। रोगी व्यक्ति दिनभर रोग के कारण चिन्ताग्रस्त रहता है और डाक्टरो, वैद्यों और हकीमों के चक्कर काटता रहता हैं।

व्यायाम न करने से हानियाँ

जहाँ व्यायाम करने से हमें अनेक लाभ होते हैं, वहाँ व्यायाम न करने से कुछ हानियाँ भी होती हैं । जो लोग व्यायाम नहीं करते उनके पेट में गैस बनने लगती है। उनका पेट बढ़ जाता है। साथ ही चर्बी बढ़ने से शरीर का वजन भी बढ़ जाता है। ऐसे लोगों में रक्त-चाप (Blood Pressure) का विकार भी उत्पन्न हो जाता है। रोगी व्यक्ति ही आलस्य का शिकार बनता है तथा काम काज में उसका मन नहीं लगता। धीरे-धीरे उसका शरीर कमजोर होने लगता है। रोगी व्यक्ति का अल्पायु में ही देहान्त हो जाता है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि व्यायाम न करने से मानव शरीर क्षीण होकर नष्ट हो जाता है।

व्यायाम के लाभ 

इसमें दो मन नहीं हो सकते कि व्यायाम स्वास्थ्य का रक्षक है लेकिन हमें नियमित व्यायाम करना चाहिए। जो लोग कुछ दिन व्यायाम करके छोड़ देते हैं उनको लाभ के स्थान पर हानि होती है । पुनः हमें व्यायाम आयु और शारीरिक शक्ति के अनुसार करना चाहिए । व्यायाम से हमारा शरीर बलवान् होता है, शारीरिक शक्ति बढ़ती है और शरीर में चुस्ती तथा फुर्ती आती है। जो लोग प्रातः उठकर नियमित रूप से व्यायाम करते है उनमें दिन भर उत्साह बना रहता है। हर काम में उनका मन लगता है तथा आलस्य उनके पास कभी नहीं फटकता । प्रतिदिन समय पर व्यायाम करने से खूब भूख लगती है और खाया-पीया सब पच जाता है। इससे शरीर में स्वस्थ खून का निरन्तर संचरण होता है तथा शरीर के मांस पिण्ड और हड्डियाँ मजबूत बनती हैं । विशेषकर, जो विद्यार्थी नित्य-प्रतिदिन व्यायाम करते है, वे पढ़ने में भी प्रवीण होते हैं तथा अपने भावी जीवन में भी विकास करते हैं। उनके शरीर भी हष्ट-पुष्ट होते हैं । परन्तु जो विद्यार्थी व्यायाम नहीं करते, उनका शरीर दुबला-पतला होने के साथ-साथ रोगों का शिकार होता रहता है ।

व्यायाम के प्रकार  

आजकल व्यायाम के अनेक प्रकार प्रचलित हैं। प्राचीन काल में दण्ड-बैठक निकालना या कुश्ती करना ही व्यायाम माना जाता था। लेकिन व्यायाम में वे सभी शारीरिक क्रियाएँ आ जाती है जिनसे शरीर के अंग सक्रिय हो कर पुष्ट होते हैं । प्रातःकाल उठ कर खुली हवा में दौड़ लगाना, घुड़सवारी करना, नदी या सरोवर में तैरना, अखाड़े में कुश्ती करना या हाथ-पैरों को हिलाकर कसरत करना आदि व्यायाम की अनेक पद्धतियाँ हैं । यह कहना कठिन है कि इनमें से कौन-सी पद्धति अधिक लाभकारी हैं ।

खेलकूद की आवश्यकता 

 व्यायाम के श्रेष्ठ साधन खेलकूद है। इसीलिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में खेलकूद की विशेष व्यवस्था रहती है । फुटबाल, वालीबाल, बैडमिण्टन, खो-खो, कबड्डी, क्रिकेट, बास्किट बाल जमनास्टिक आदि अनेक प्रकार के खेल हैं । जो विद्यार्थी नियमित रुप से किसी न किसी खेल में भाग लेता है, उसका शरीर हमेशा स्वस्थ रहता है। ये खेल-कूद विद्यार्थी को एक अनुशासित एवं चरित्रवान् नागरिक बनाते हैं। आजकल हमारी सरकार भी खेल-कूदों की ओर विशेष ध्यान दे रही है।

प्रातःकाल का भ्रमण और योगाभ्यास 

 व्यायाम का सर्वाधिक सरल तरीका प्रातःकाल का भ्रमण है। इस समय वायु शुद्ध एवं स्वच्छ होती है। जो लोग प्रातः काल में भ्रमण करते हैं या तेज़ चलते हैं,उनका शरीर भी स्वस्थ रहता है। वृद्ध एवं रोगियों के लिए तो प्रातः काल का भ्रमण विशेष रुप से उपयोगी होता है।
व्यायाम का एक अन्य साधन है योगाभ्यास । यह सस्ता एवं सरल व्यायाम है। घर के  आंगन अथवा खुले स्थान पर पाँच-सात आसन करने से शरीर काफी स्वस्थ रहता है ।
पदमासन, शवासन, प्राणायाम, सर्वांगासन, गोमुख आसन, सूर्य नमस्कार आदि कुछ ऐसे आसन समय  हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति कर सकता है। लेकिन आसन सीखने के लिए किसी योग्य शिक्षक 
की सहायता अवश्य लेनी चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है।  स्वास्थ्य मानव शरीर के लिए नितान्त आवश्यक है। यह सच्चा धन है। इस धन की रक्षा बके लिए प्रतिदिन व्यायाम ज़रुरी है । व्यायाम करने के पश्चात् हमें स्वस्थ भोजन और फल  भी खाने चाहिए । परन्तु हम यह ध्यान रखें कि अधिक व्यायाम शरीर को हानि भी पहुंचा  सकता है। अतः सही मात्रा में व्यायाम ही लाभकारी होता है ।









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