राज्य सचिवालय | State Secretariat in Hindi

 राज्य सचिवालय | State Secretariat in Hindi

प्रिय, पाठकों आज के इस पोस्ट में हमने राज्य सचिवालय | State Secretariat in Hindi के बारे में जानकारी  दी है। राज्य सचिवालय | State Secretariat in Hindi  भारतीय लोक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग है।

यहाँ राज्यपाल(Governor) के बारे में जो जानकारी दी गई है वह इस प्रकार से है :-

  • राज्य सचिवालय क्या होता है?
  • मुख्य सचिव कौन होता है?
  • विभागीय सचिव कौन होता है?
  • संयुक्त सचिव कौन होता है?
  • उप सचिव कौन होता है?
  • अधीनस्थ सचिव कौन होता है?
  • सचिवालय के क्या कार्य होते हैं?
राज्य सचिवालय | State Secretariat in Hindi


राज्य सचिवालय क्या होता है| State Secretariat in Hindi

किसी भी राज्य में राज्यपाल संविधान की धारा 154 के अनुसार अपनी कार्यपाकिा शक्तियों का प्रयोग करता है। अनुच्छेद 154 के अनुसार - 'राज्य की कार्यपालिका शक्तियां राज्यपाल में निहित की गई हैं जिन का प्रयोग वह या तो स्वयं प्रत्यक्ष रूप से करता है। या अपने अधीन कार्यपालिका द्वारा करता है।" राज्यपाल नाम मात्र का संवैधानिक अध्यक्ष है। मंन्त्रिमण्डल ही राज्य की वास्तविक कार्य राज्यपालिका है; वही राज्यपाल की शक्तियों का प्रयोग करती 
है। राज्य के प्रशासन को चलाने के लिए विभिन्न प्रशासकीय विभागों की स्थापना की गई है हर विभाग किसी न किसी मन्त्री के पास होता है जो कि उस का राजनैतिक मुखिया होता है। प्रत्येक विभाग का एक सचिव होता है जो उस विभाग का प्रशासनिक मुखिया होता है। सचिव की नियुक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा (I.A.S.) के अधिकारियों में से की जाती है। प्रशासनिक सेवा के कर्मियों का सामूहिक कार्यालय ही सचिवालय कहलाता है। सचिवालय का प्रशासनिक अध्यक्ष मुख्य सचिव और राजनैतिक अध्यक्ष मुख्यमन्त्री होता है।

राज्य सचिवालय का संगठन 

सचिवालय के प्रशासनिक अधिकरी व कर्मचारी मन्त्रिपरिषद के काम के कुशल संचालन में सहायता करते हैं। राज्य सचिवालय के संगठन में निम्नलिखित प्रशासनिक अधिकारी आते हैं:

1. मुख्य सचिव :

 यह सचिवालय का प्रशासनिक अध्यक्ष होता है। मुख्य सचिव मुख्यमन्त्री का प्रमुख के सलाहकार होता है। मुख्य सचिव का मुख्य कार्य विभिन्न विभागों में तालमेल करना व उन पर नियंत्रण रखना होता है।
राज्य प्रशासन में इस की मुख्य भूमिका होती है। वह राज्य व केन्द्र के साथ राज्य के सम्बंधो को बनाए रखने में मुख्य भूमिका अदा करता है।

2. विभागीय सचिव : 

प्रत्येक विभाग कर एक विभागीय सचिव होता है। वह (I.A.S.) भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक वरिष्ठ अधिकारी होता है वह विभाग से सम्बधित मन्त्री का मुख्य परामर्श दाता होता है। प्रशासनिक मामलों में वह मुख्यसचिव के अधीन होता है।

3. संयुक्त सचिव : 

संयुक्त सचिव, सचिव के अधीन काम करता। वह प्रशासनिक कार्य में उस की सहायता करता है।

4. उप-सचिव : 

उप-सचिव विभागीय सचिव अथवा संयुक्त सचिव की सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है।

5. अधीनस्थ सचिव : 

यह अधिकारी उप-सचिव की सहायता करता है। इस पद पर राज्य लोक सेवा आयोग के अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। अधिकारियों की सहायता के लिए अनुभाग अधिकारी, सहायक, टंकणकर्ता, लिपिक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होते हैं।

सचिवालय के कार्यः

1. नीति निर्माण व नियोजन : 

राज्य के भिन्न-भिन्न विभागों में प्रशासन के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए निश्चित नीति व नियोजन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। राज्य के विकास और समृद्धि के लिए सचिवालय योजनाओं को अन्तिम रूप देता है। उन योजनाओं को  योजना आयोग से मंजूर करवाने में सचिवालय की अहम भूमिका होती है।

2. मन्त्रिमण्डल से सम्बन्धित कार्य : 

सचिवालय सभी कार्यों में मन्त्रिपरिषद की सहायता, परामर्श व मार्गदर्शन का कार्य करता है। प्रत्येक मन्त्री अपने-अपने विभाग से सम्बन्धित विभिन्न प्रस्तावों अथवा समस्याओं को निपटाने के लिए सचिवालय से ही परामर्श अथवा मार्ग दर्शन प्राप्त करता है।

3. परामर्श कार्य : 

प्रत्येक सचिव आवश्यक सूचनाओं और तथ्यों की सही जानकारी सम्बंधित मन्त्री को देता है। विकासात्मक कार्यों में सचिवों के परामर्श का बड़ा महत्त्व है।

4. केन्द्र-राज्य के मध्य सम्पर्कः

 सचिवालय राज्य और केन्द्र के मध्य एक कड़ी का काम करता है। सचिवालय के माध्यम से ही चुनाव आयोग, जनगणना, वित्त आयोग, योजना आयोग आदि से सम्बंध स्थापित किया जाता है। केन्द्र के दिशा निर्देशों अथवा नीतियों का अनुपालन सचिवालय द्वारा ही राज्यों में करवाया जाता है।

5. वित्त सम्बन्धी कार्य: 

सचिवालय राज्य की आर्थिक स्थिति और विकास के लिए कार्य करता है। वित्त विभाग राज्य के बजट को अन्तिम रूप देता है। राज्य के सभी विभाग अपनी आय व्यय का ब्यौरा आयोग को भेजते हैं।

6. अधिकारियों का मार्ग दर्शन : 

सचिवालय किसी भी विभाग के अधिकारी की कठिनाई जानने व उस के मार्गदर्शन में सहयोग व सहायता प्रदान करता है। ऐसा करने से कार्य में कार्य कुशलता बढ़ती है।

7. कार्मिक प्रशासन : 

विभिन्न विभागों में भर्ती, प्रशिक्षण, स्थानांतरण सेवा शर्तो सम्बन्धी नियम सचिवालय में ही बनाए जाते हैं। अत: प्रशासनिक दृष्टि से सचिवालय की अहम भूमिका होती है।

8. विधायनी कार्यः

 विधानसभा में मन्त्रियों द्वारा जो भी बिल पेश किए जाते हैं वे सचिवालय द्वारा ही तैयार किए जाते हैं। विधान सभा में जो प्रश्न पूछे जाते हैं उन के उत्तर भी सचिवालय द्वारा ही तैयार किए जाते हैं।

8. समन्वयात्मक कार्य : 

प्रदेश में अनेक विभाग होते हैं। सचिवालय हर विभाग में तालमेल स्थापित करता है। सभी विभागों के सचिव मुख्य सचिव के अधीन कार्य करते हैं। मुख्य सचिव प्रदेश का प्रशासनिक अध्यक्ष होता है। समन्वय स्थापित करना मुख्य सचिव का कार्य है।


Post a Comment

Previous Post Next Post