क्रिया-विशेषण किसे कहते हैं || Adverb in Hindi

प्रिय, पाठकों इस पोस्ट में हमने क्रिया-विशेषण ( Adverb in Hindi) के बारे में जानकारी प्रदान की है। हमने यहाँ क्रिया-विशेषण किसे कहते हैं (What is Adverb in Hindi) , क्रिया-विशेषण के भेद ,क्रिया-विशेषण का अर्थ (Adverb Definition in Hindi) और उनकी उदाहरण सहित व्याख्या की है। 
यहाँ क्रिया-विशेषण के बारे में जो जानकारी दी गई है वह इस प्रकार है -
  • क्रिया-विशेषण किसे कहते है (Kriya Vesheshan kise kahte hain)
  • क्रिया-विशेषण के कितने भेद होते हैं (Kriya Vesheshan ke bhed)
  • कालवाचक क्रिया-विशेषण (What is Adverb of Time in Hindi)
  • परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण (What is Adverb of Quantity in Hindi)
  • स्थानवाचक क्रिया-विशेषण (What is Adverb of Place in Hindi)
  • रीतिवाचक क्रिया-विशेषण  (What is Adverb of Manner in Hindi)
Kriya Visheshan || क्रिया विशेषण किसे कहते हैं || Adverb in Hindi || Meaning of Adverb in Hindi



क्रिया-विशेषण किसे कहते है ( Adverb in Hindi)

परिभाषा (Adverb meaning in Hindi) :- क्रिया-विशेेेषण उस शब्द को कहते हैं जो किसी क्रिया की विशेषता बताए ।
जैसे :- वह प्रतिदिन खेलता है ।
  •  कुछ खा लो । 
  •  मोहन सुन्दर लिखता है ।
ऊपर के उदाहरणों में प्रतिदिनकुछसुन्दर आदि शब्द क्रिया की विशेषता प्रकट कर रहे हैं, अतः ये क्रिया-विशेषण हैं।

क्रिया-विशेषण के भेद (Types of Adverb In Hindi)

क्रिया-विशेषण के चार मुख्य भेद हैं :
1. कालवाचक (Adverb of Time)
2. स्थानवाचक (Adverb of Place)
3. परिमाणवाचक (Adverb of Quantity)
4. रीतिवाचक (Aaverb of Manner)

1. कालवाचक (Adverb of Time in Hindi)

जो क्रिया-विशेषण शब्द क्रिया के समय को सूचित करते हैं, उन्हें कालवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं। 
जैसे :- सीता कल जाएगी।
अब, अभी, कब, कभी, जब, जभी, अब तक, कब तक, जब तक, निरन्तर, बार बार, बहुधा, प्रातः, सायं, प्रतिदिन, प्रतिमास, प्रतिवर्ष, आज, कल, परसो, सदा, पश्चात, देर से आदि अन्य उदाहरण हैं।

2. स्थानवाचक (Adverb of Place in Hindi)

जो क्रिया-विशेषण क्रिया से स्थान, दिशा का ज्ञान कराएँ उन्हें स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं।
जैसे :- तुम आगे चलो, में पीछे आता हूँ। वे यही आस-पास होंगे ।
कहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ, यहाँ, अन्दर, बाहर, नीचे-ऊपर-इधर-उधर, आर-पार, चारों ओर, आस-पास, निकट, मध्य, दूर आदि अन्य उदाहरण हैं ।

3. परिमाणवाचक (Adverb of Quantity in Hindi)

जिन क्रिया-विशेषण शब्दों से क्रिया की अधिकता तथा न्यूनता आदि परिमाण का पता लगे, उन्हें परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं ।
जैसे : - उतना पढ़ो जितना आवश्यक है ।
अति, अत्यन्त, अधिक, कुछ, जरा, तनिक, बस, इतना, उतना, जितना, कितना, थोड़ा सा, किंचित, सर्वथा, लगभग, निपट, पर्याप्त, खूब आदि अन्य उदाहरण हैं ।

4. रीतिवाचक (Adverb of Manner in Hindi)

जिन क्रिया-विशेषण शब्दों से क्रिया की रीति या विधि का पता चले, उन्हें रीतिवाचक क्रिया-विशेषण कहते हैं ।
जैसे :- धीरे-धीरे चलो । वह तो तेज़ भागता है । वह पुस्तक अवश्य पढ़ो ।
कैसे, ऐसे, वैसे, जैसे, सुखपूर्वक, ज्यों त्यों, उचित, अनुचित, धीरे-धीरे, सहसा, ध्यानपूर्वक, सच, तेज़, झूठ, यथार्थ, वस्तुतः, अवश्य, न, नहीं, मत, अतएव, वृथा आदि अन्य उदाहरण हैं।
रीतिवाचक संज्ञा के आठ भेद भी हैं - 
  • विधिबोधक, 
  • निश्चयबोधक, 
  • अनिश्चयबोधक,
  • हेतुबोधक, 
  • निषेधवाचक, 
  • प्रश्नवाचक, 
  • स्वीकृतिबोधक, 
  • अवधारणाबोधक 


क्रिया-विशेषण की रचना

संज्ञा से, सर्वनाम से, विशेषण से, क्रिया से शब्दों की द्विरुक्ति और भिन्न-भिन्न शब्दों के मेल से क्रिया विशेषण बनते हैं। 
जैसे :-
  • संज्ञा से :- महीने तक, दिन भर, ध्यानपूर्वक, बूंद-बूंद करके, प्रेम-वश, वर्षों तक इत्यादि।
  • सर्वनाम से :- यहाँ, जहाँ, वहाँ, तहाँ, कहाँ, कहीं, इधर, उधर, जिधर, किधर, जितना, उतना इत्यादि ।
  • विशेषण से :- ऐसे, वैसे, जैसे, धीरे, तीसरे, चौथे इत्यादि ।
  • क्रिया से :- बैठे हुए, कहते हुए, जाते हुए, सोते, जागते इत्यादि ।
  • शब्दों की द्विरुक्ति से :- एकाएक, धड़ाधड़, तडातड़, धीरे-धीरे, हाथों-हाथ इत्यादि ।
  • भिन्न-भिन्न शब्दों के मेल से :- कहीं न कहीं, एकदम, आगे-पीछे, सांझ सवेरे, यथासम्भव, एक-एक करके इत्यादि ।
पुनः संस्कृत के कुछ अव्ययीभाव समास, तृतीया विभक्ति का एक वचन तथा शः, तः प्रत्यान्त शब्द क्रिया विशेषण होते हैं। 
जैसे :- प्रतिदिन, कृपया, येन केन प्रकारेण, शतशः, प्रत्यक्षतः इत्यादि।

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी यह पोस्ट क्रिया-विशेषण किसे कहते हैं (Adverb in Hindi) पसन्द आई होगी।





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