अम्ल, भस्म और क्षार |Acids, Bases and Salts

अम्ल, भस्म और क्षार |Acids, Bases and Salts

प्रिय, पाठकों आज की इस लेख में हमने अम्ल, भस्म और क्षार |Acids, Bases and Salts के बारे में जानकारी प्रदान की है।
अम्ल, भस्म और क्षार |Acids, Bases and Salts के बारे में जो जानकारी दी जा रही है वह इस प्रकार से है :-

  • अम्ल(Acids) : गुण और विभिन्न अम्लों के उपयोग
  • भस्म या क्षार(Bases) : गुण और विभिन्न अम्लों के उपयोग
  • लवण(Salts) : वर्गीकरण और विभिन्न अम्लों के उपयोग
  • आरहेनियस का आयनिक सिद्धांत (Arrhenius’s Ionic Theory)
  • ब्रान्सटेड और लॉरी (Bronsted and Lowry Theory)
  • लिविस का सिद्धांत (Lewis’s Electronic Theory)
  • pH मान क्या होता है(What is pH value)

अम्ल, भस्म और क्षार |Acids, Bases and Salts


 अम्ल किसे कहते हैं (Acids in Hindi)

अम्ल (Acids):अम्ल अर्थात् खट्टा। सर राबर्ट बायल ने कहा था कि वस्तुओं का एक ऐसा समूह है जो दूसरों से भिन्न है तथा जिनके गुण आपस में मिलते जुलते हैं वह अम्ल हैं अम्ल वे यौगिक पदार्थ हैं, जिनमें एक या एक से अधिक विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणु विद्यमान हो तथा जिन्हें अंशतः या पूर्णतः धातुओं या धातुओं के सदृश आचरण करने वाले मूलकों द्वारा विस्थापित करने पर लवण का निर्माण होता हो, जो क्षारक या क्षार से अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाते हों, जिनके जलीय घोल नीले लिटमस को लाल करते हों तथा जो स्वाद में खट्टे हों।

अम्ल (Acids) के गुण 

1.  अम्ल (Acids) के गुण निम्नलिखित हैं:
(1) नीले लिटमस के रंग को लाल कर देते हैं।
(ii) अम्ल स्वाद में खटटे होते हैं।
(iii) क्षार उनके गुणों को नष्ट कर देता है।
(iv) मनुष्य पर वह संक्षारक घाव डालते हैं।

अम्लों के उपयोग(Uses of Acids) 

(i) सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग: पेट्रोलियम के शोधन में, कई प्रकार के विस्फोटक बनाने में, रंग व औषधियाँ बनाने में, संचायक बैटरियों में आदि।
(ii) नाइट्रिक अम्ल का उपयोग: औषधियों के निर्माण में, उर्वरक बनाने में, फोटोग्राफी में, विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में, अम्लराज बनाने में, प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में आदि।
(iii) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग: प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में, अम्लराज बनाने में, रंग एवं औषधि निर्माण में आदि।
(iv) एसीटिक अम्ल का उपयोग: विलायक के रूप में, सिरका निर्माण में, एसीटोन बनाने में, खट्टे खाद्य पदार्थ बनाने में आदि।
(v) फार्मिक अम्ल का उपयोग जीवाणुनाशक के रूप में, फलों को संरक्षित करने में, रबड़ के स्कदन में, चमड़ा उद्योग में आदि।
(vi) ऑक्जेलिक अम्ल का उपयोग: फोटोग्राफी में, कपड़ों की छपाई व रंगाई में, चमड़े के विरंजक के रूप में, कपड़े पर स्याही के धब्बे को हटाने में आदि।
(vii) बेंजोइक अम्ल का उपयोग: दवा व खाद्य पदार्थों के संरक्षण में आदि।
(viii) साइट्रिक अम्ल का उपयोग: धातुओं को साफ करने में, खाद्य पदार्थों व दवाओं के निर्माण में, कपड़ा उद्योग में आदि।

भस्म या क्षार किसे कहते हैं (Bases in Hindi)

भस्म या क्षार (Bases) : क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं। क्षार धातुओं या धातुओं के सदृश आचरण करने वाले मूलकों के वे यौगिक हैं, जो अम्लों से अभिक्रिया करके लवण एवं जल बनाते हैं।

भस्म या क्षार (Bases) के गुण

(i) वे हाथ में साबुन की तरह लगते हैं।

(ii) वे लाल लिटमस के रंग को नीला कर देते हैं।

(ii) यदि उनको पानी में घोला जाए तो उनमें से विद्युत प्रवाहित हो सकती है।

(iv) अम्लों के प्रभाव में आने पर उनके गुण नष्ट हो जाते हैं।

भस्म या क्षार (Bases) के प्रकार( Type of Bases)

भस्म या क्षारक दो प्रकार के होते हैं-
(i) जल में विलेय भस्म तथा
(ii) जल में अविलेय भस्म

1. क्षार (Alkali): 

वैसे भस्म जो जल में विलेय होते हैं, क्षार (AIkali) कहलाते हैं। जैसे- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2], अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH4OH) आदि।
नोट: सभी क्षार भस्म (क्षारक) होते हैं, लेकिन सभी भस्म क्षार नहीं होते। इसका कारण यह है कि सभी भस्म जल में विलेय नही होते हैं।

2. जल में अविलेय क्षारक (water Insoluble Bases): 

जल में अविलेय क्षारक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल तो बनाते हैं, परन्तु क्षार के अन्य गुण प्रदर्शित नहीं करते हैं। जैसे- जिंक ऑक्साइड (ZnO), फेरस ऑक्साइड (FeO), फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3), ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3), कॉपर हाइड्रॉक्साइड [Cu(OH)2], फेरस हाइड्रॉक्साइड [Fe(OH)2] आदि।

भस्मों व क्षारों के उपयोग

(a) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2]: घरों में चूना पोतने में, गारा एवं प्लास्तर बनाने में, ब्लीचिंग पाऊडर (विरंजक चूर्ण) बनाने में, जल को मृदु बनाने में, अम्ल के जलन पर मरहम पट्टी करने में, चमड़ा के ऊपर का बाल साफ करने में, मिट्टी की अम्लीयता दूर करने में आदि।
(b) कास्टिक सोडा (NaOH): साबुन बनाने में, पेट्रोलियम के शुद्धीकरण में, कपड़ा एवं कागज बनाने में, दवा निर्माण में, घरों एवं कारखानों को साफ करने में आदि।
(c) पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH): प्रयोगशाला में प्रतिकर्मक के रूप में, मुलायम साबुन के निर्माण में, CO2, तथा SO2 जैसे गैसों के अवशोषक के रूप में आदि।
(d) कैल्सियम ऑक्साइड (CaO): मकान बनाने में गारे के रूप में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, सोडियम कार्बोनेट के निर्माण में, ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में आदि।
(e) मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)2]: पेट की अम्लीयता को दूर करने में, अम्ल विषाक्तीकरण (Poisoning) के एण्टीडीट (Antidote) के रूप में, चीनी उद्योग में मोलासिस से चीनी तैयार करने में आदि।
(f) मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO): औषधि निर्माण में, रबड़ पूरक के रूप में, बायलरों के प्रयोग में आदि।

लवण किसे कहते हैं(Salt in Hindi)

लवण (salt): लवण वैसे यौगिक हैं, जो अम्ल में विद्यमान विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणुओं के धातु अथवा धातु सदृश आचरण करने वाले मूलक द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से विस्थापित होने पर बनते हैं ।
अथवा
जब कोई अम्ल किसी धातु के साथ अभिक्रिया करता है तो हाइड्रोजन गैस का उत्सर्जन होता है। साथ ही संगत लवण का निर्माण होता है।
अम्ल + धातु→ लवण + हाइड्रोजन गैस
उदाहरण-
(i) H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल) + Zn (जिंक) → ZnSO4 (जिंक सल्फेट) + H2 (हाइड्रोजन) ↑
(ii) HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) + NH4OH (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड) → NH4Cl (अमोनियम क्लोराइड -लवण) + H2O (जल)
अर्थात् अम्ल और क्षारक (भस्म) की अभिक्रिया के फलस्वरूप जल के साथ बना दूसरा यौगिक लवण कहलाता है।
HCI (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) + NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) → NaCl (सोडियम क्लोराइड -लवण) + H2O
  • जब अम्ल किसी धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट से अभिक्रिया करता है तो यह संगत लवण, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल उत्पन्न करता है।
धातु कार्बोनेट/धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल→ लवण + Co2 + H2O
  • जब अम्ल किसी धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है तो यह संगत लवण तथा जल उत्पन्न करता है।
धातु ऑक्साइड + अम्ल → लवण + जल
  • लवण के सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं।

लवणों का वर्गीकरण(Classification of Salts)

लवणों को निम्नलिखित वगों में बाँटा गया है-
(i) सामान्य लवण (Normal salts): किसी अम्लीय अणु से हाइड्रोजन परमाणुओं के पूर्णतः स्थानान्तरण द्वारा निर्मित लवण को सामान्य लवण कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वे लवण जो अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु या हाइड्रॉक्सिल आयन से मुक्त रहते हैं, सामान्य लवण कहलाते हैं। जैसे— Na2SO4, CaSO4, Na3PO4, Na2S, NaCl, KCI, FeCl3, आदि।
(ii) अम्लीय लवण (Acidic salts): वैसे लवण जिसमें एक या एक से अधिक स्थानान्तरण योग्य हाइड्रोजन परमाणु बने रहते हैं, अम्लीय लवण कहलाते हैं। जैसे- NaHCO3, NaHSO4 आदि।
(iii) भास्मिक लवण (Basic salts): किसी अम्ल द्वारा भस्म के आंशिक उदासीनीकरण के फलस्वरूप बने हुए लवण को भास्मिक लवण कहते हैं। जैसे- Pb(OH)Cl, Bi(OH)2NO3, CuCO3.Cu(OH)2, 2РbCO3.Рb(OH)2, Mg(OH)Cl आदि।
(iv) मिश्रित लवण (Mixed salts): वैसे लवण जिसमें एक से अधिक भास्मिक या अम्लीय मूलक उपस्थित हों, मिश्रित लवण कहलाते हैं। जैसे- सोडियम पोटैशियम सल्फेट (NaKSO4), विरंजक चूर्ण [Ca(OCI)CI] आदि।

(v) जटिल लवण (Complex salt): वैसा लवण जिसमें एक जटिल मूलक उपस्थित रहता है और जो घोल में भी अपना पृथक अस्तित्व बनाये रखता है, जटिल लवण कहलाता है। जैसे- पोटैशियम फेरोसायनाइड-K4[Fe(CN)6], पोटैशियम मरक्यूरिक आयोडाइङ– K2[Hg I4], डाइएमिनो सिल्वर क्लोराइड–[Ag(NH)3]Cl आदि।

(vi) द्विक या युग्म लवण (Double Salts): दो सामान्य लवणों से निर्मित लवण को द्विक या युग्म लवण कहते हैं। इसमें रवा जल (Water of Crystallisation) भी रहता हैI द्विक लवण जल में घुलकर दो प्रकार के धातुई आयन निर्गत करते हैं। जैसे :-
मोहर लवण [FeSO4(NH4),SO46H2O],
पोटाश एलम [K2SO4.Al2(SO4),.24H2O) आादि।

लवणों के उपयोग (Uses of Salts)

(i) सोडियम क्लोराइड (NaCl): मानव आहार का आवश्यक अंग, आचार के परिरक्षण में, मांस एवं मछली के संक्षारण में, अनेक रासायनिक यौगिकों के निर्माण में आदि।
(ii) सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3): रसोईघरों में, पेट की अम्लीयता को कम करने की औषधि के रूप में, बेकिंग पाउडर के रूप में, अग्निशामक यंत्रों में आदि।
(iii) सोडियम कार्बोनेट (Na,CO3,10H2O): कपड़ों की धुलाई में, काँच निर्माण में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, अपमार्जक (डिटर्जेण्ट) चूर्ण के निर्माण में, अनेक रासायनिक यौगिकों के निर्माण में आदि।
(iv) पोटैशियम नाइट्रेट (KNO3): गन पाउडर बनाने में, आतिशबाजी का सामान बनाने में, काँच उद्योग में, उर्वरक के रूप में आदि।
(v) कॉपर सल्फेट (CuSO4.5H2O): कीटाणुनाशक के रूप में, विद्युत् लेपन में, रंगाई एवं छपाई में, कॉपर के शुद्धीकरण में आदि।
(vi) पोटाश एलम [K2SO4.Al2(SO4)3.24H2O]: जल के शुद्धीकरण में, औषधि निर्माण में, रंगाई में रंग बंधक के रूप में, शरीर के किसी अंग के थोड़ा कट जाने पर खून का बहना रोकने में, चमड़ा उद्योग में आदि।

आरहेनियस का आयनिक सिद्धांत (Arrhenius’s Ionic Theory): 

अम्ल :- अम्ल वह पदार्थ है, जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) देता है। HCl, H₂SO4, HNO3 ,CH3COOH अम्ल हैं।
रसायनिक समीकरण से समझते हैं
HCl + जल ⇌ H+ (aq) + Cl (aq)
H₂SO4 + जल ⇌ 2H+ (aq) + SO4— (aq)
HNO3 + जल ⇌ H+ (aq) + NO3 (aq)
CH3COOH + जल ⇌ H+ (aq) + CH3COO (aq)
 भस्म या क्षार :- इस सिद्धांत के अनुसार भस्म वे पदार्थ हैं, जो जलीय घोल में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) देता है। 
जैसे - NaOH, KOH, NH₄OH क्षार हैं।
रसायनिक समीकरण से समझते हैं
NaOH + जल ⇌ Na+ (aq) + OH (aq)
NH4OH + जल ⇌ NH4+ (aq) + OH (aq)

ब्रान्सटेड और लॉरी (Bronsted and Lowry Theory

अम्ल :- इस सिद्धांत के अनुसार अम्ल वे पदार्थ हैं, जो किसी दूसरे पदार्थ को प्रोटॉन प्रदान करने की क्षमता रखते हैं।
अम्ल ⇌ H+ + भस्म
रसायनिक समीकरण से समझते हैं
CH3COOH ⇌ H+ CH3COO
HNO⇌ H+ NO3
H2O ⇌ H+ OH
भस्म या क्षार :- इस सिद्धांत के अनुसार भस्म वह पदार्थ है, जो किसी दूसरे पदार्थ से प्रोटीन ग्रहण करने की क्षमता रखता है। जैसे :-
OH + H+ ⇌ H2O
CH3COO– ⇌ CH3COOH

लिविस का सिद्धांत (Lewis’s Electronic Theory): 

अम्ल :- इस सिद्धांत के अनुसार अम्ल वह पदार्थ (अणु, आयन या मूलक) है, जिसमें इलेक्ट्रॉन का एक निर्जन युग्म (Lone Pair) स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है। 
उदाहरण :- कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3) के संयोग से कैल्सियम सल्फेट (CaSO4) का निर्माण।
इसमें SO3 लिविस अम्ल है।
 भस्म या क्षार :-   इस सिद्धांत के अनुसार भस्म वह पदार्थ है, जिसमें इलेक्ट्रॉनों के एक निर्जन जोड़ी (lone Pair) प्रदान करने की क्षमता होती है। जैसे- हाइड्रोनियम आयन का बनना, जिसमें H2O लीविस भस्म है।

pH मान (pH value) क्या होती है

pH मान (pH value): pH मूल्य एक संख्या होती है, जो पदार्थों की अम्लीयता व क्षारीयता को प्रदर्शित करती है। इसका मान हाइड्रोजन आयन (H+) के सांद्रण के व्युत्क्रम के लघुगुणक (Logarithm) के बराबर होता है।

अथवा

किसी भी घोल का pH मान उसके ऋणात्मक लघुगणक आयन [H₃O⁺] आयन की सान्द्रता होती है।
अम्लीय घोल में : [H₃O⁺] > [OH⁻]
क्षारीय घोल में : [H₃O⁺] < [OH⁻ ]
उदासीन घोल में : [H₃O⁺] = [OH⁻ ]

  • pH का मान 0 से 14 के बीच होता है। 
  • जिन विलयनों के pH का मान 7 से कम होता है, वे अम्लीय होते हैं। 
  • जिन विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है, वे क्षारीय होते हैं। उदासीन विलयनों के pH का मान 7 होता है। 
  • pH मूल्य का उपयोग ऐल्कोहॉल, चीनी, कागज आदि उद्योगों में होता है।

बफर solution किसे कहते हैं?

बफर विलियन (Buffer Solution): वह विलियन जो कि अम्ल या क्षार की साधारण मात्राओं को अपनी प्रभावी अम्लता या क्षारता में पर्याप्त परिवर्तन किए बिना अवशोषित कर लेता है, बफर विलयन कहलाता है। जैसे- सोडियम ऐसीटेट तथा ऐसीटिक एसिड का मिश्रण एक प्रभावी बफर विलयन है, जब उसे पानी में विलीन किया जाता है। जिस विलयन में बफर विलयन अंतर्विष्ट होता है, वह अत्यधिक मंद अम्ल के रूप में कार्य करता है।


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