संज्ञा किसे कहते हैं || Noun in Hindi

प्रिय, पाठकों इस पोस्ट में हमने संज्ञा ( Noun in Hindi) के बारे में जानकारी प्रदान की है। हमने यहाँ संज्ञा किसे कहते हैं (Noun meaning in Hindi) , संज्ञा के भेद ,संज्ञा के विकार (Inflections of Nouns) और उनकी उदाहरण सहित व्याख्या की है। 
यहाँ संज्ञा के बारे में जो जानकारी दी गई है वह इस प्रकार है -
  • संज्ञा किसे कहते है (Sangya kise kahte hain)
  • संज्ञा के कितने भेद होते हैं (Sangya ke bhed)
संज्ञा किसे कहते हैं || Noun in Hindi || sangya ke Bhed || Noun meaning in Hindi



संज्ञा किसे कहते है ( Sangya kise kahte hain)

अर्थ एवं स्वरूप :- संज्ञा शब्द संस्कृत के 'सम्' उपसर्ग तथा 'ना' धातु के मिलने से बना है। 'ज्ञा' धातु का अर्थ है- बोध कराना । अतः इसका अर्थ होगा सम् अर्थात् सम्यक प्रकार से बोध कराना अर्थात् जानकारी देना । उदाहरण के लिये नीचे लिखे हुए वाक्य देखिए ।
(क) गंगा भारत की प्रसिद्ध नदी है ।
(ख) इस विद्यालय में बहुत छात्र हैं।
(ग) हमें देश की एकता के लिये प्रयत्ल करना चाहिये ।
(घ) बुढ़ापा दुःखों का घर है और यौवन आन्नद का।
ऊपर के वाक्यों में काले शब्द गंगा, भारत, नदी, विद्यालय, छात्र, देश, एकता, बुढ़ापा, दुःखों, घर, यौवन, आनन्द आदि वस्तु, स्थान, प्राणी, भाव आदि के नाम हैं । 
इसका मतलब हुआ नाम को ही संज्ञा कहते हैं। इस संसार में जितनी भी वस्तुएँ, स्थान, प्राणी आदि हैं उनका कोई न कोई तो नाम होता है। इन्हीं नामों को हम संज्ञा कहेगे।
परिभाषा :- संज्ञा शब्द की परिभाषा इस प्रकार से है :
किसी वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम का बोध कराने वाले शब्दों को संज्ञा कहते हैं।
जैसे :- राम, सोहन, हिमालय, गुलाब, लड़का, मनुष्य, गाय, प्रेम, सुन्दरता आदि ।


संज्ञा के भेद (Types of Noun In Hindi)

संज्ञा के मुख्य तीन भेद हैं :- 
1. जातिवाचक ( Common Noun )
2. व्यक्तिवाचक ( Proper Noun )
3. भाववाचक ( Abstract Noun )
परन्तु कुछ विद्वानों ने अंग्रेजी व्याकरण के अनुसरण पर संज्ञा के दो भेद और भी माने हैं। ये भेद हैं -
4. समुदाय वाचक संज्ञा ( Collective Noun)
5. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun 

1. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun in Hindi)

जिस संज्ञा शब्द से सम्पूर्ण जाति को बोध हो अर्थात् एक ही प्रकार की बहुत-सी वस्तुओं में प्रत्येक का ज्ञान हो सके, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। 
जैसे :- नगर, पशु, मनुष्य आदि ।

2. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun in Hindi)

जिस संज्ञा शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का ज्ञान हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे :- राम, मोहन, दिल्ली, शिमला, गंगा, रामचरितमानस आदि ।

3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun in Hindi)

 जिन संज्ञाओं से किसी पदार्थ के विशेष गुण, धर्म तथा व्यापार आदि का ज्ञान हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे :- मधुरता, वीरता, प्रेम, आनन्द, क्रोध, भक्ति, बुढ़ापा, यौवन आदि
भाववाचक संज्ञाएँ चार प्रकार के शब्दों से बनती हैं :
1. जातिवाचक संज्ञाएँ : बूढ़ा से बुढ़ापा, लड़का से लड़कपन, पशु से पशुतत्व, मनुष्य से मनुष्यता (मनुष्यत्व) आदि ।
2. विशेषण से :- सुन्दर से सुन्दरता (सौन्दय), मूर्ख से मूर्खता, चतुर से चतुरता, लम्बा से लम्बाई, आलसी से आलस्य आदि ।
3. क्रिया से :- लिखना से लिखाई, बुनना से बनावट, देना से दान, लड़ना से लड़ाई, पढ़ना से पढ़ाई, चलना से चाल आदि ।
4. सर्वनाम से :- अपना से अपनापन (अपनत्व), निज से निजत्व (निजता), अहं से अहंकार आदि।
भाववाचक संज्ञाओं की सूची यहाँ देखें :- भाववाचक संज्ञाएँ

4. समुदायवाचक संज्ञा (Collective Noun in Hindi)

 जो संज्ञा शब्द किसी एक व्यक्ति का वाचक न होकर समूह या समुदाय के वाचक होते हैं, उन्हें समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे :- कक्षा, सेना, संसद, भीड़, संघ, टोली आदि ।

5. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun in Hindi)

जिन संज्ञा शब्दों से उस सामग्री या पदार्थ का बोध हो जिनसे कोई वस्तु बनी हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे: लोहा, सोना, चाँदी, पानी, घी, मिट्टी, फल आदि ।

ध्यान दें :- कुछ विद्वान समुदायवाचक तथा द्रव्यवाचक संज्ञा-भेदों को अलग नहीं मानते । वे इन को जातिवाचक संज्ञा में ही गिनते हैं ।

☞ कुछ ध्यान देने योग्य बातें

(क) कभी-कभी व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक बन जाती है । ऐसा तब होगा जब व्यक्ति विशेष के गुण किसी अन्य में दिखाये जायें ।
जैसे :- वी. पी. सिंह आज का चाणक्य है। यहाँ चाणक्य का प्रयोग चाणक्य के लिए नहीं हुआ, बल्कि ऐसे व्यक्ति के लिए हुआ है जो कूटनीतिज्ञ है । 
एक अन्य उदाहरण - राममूर्ति दूसरे भीम थे।

(ख) कभी-कभी जातिवाचक शब्द गुण-विशेष के कारण व्यक्तिवाचक के समान प्रयुक्त होते हैं। जैसे :- गोस्वामी जी तुलसीदास की महान् रचना रामचरितमानस है । यहाँ गोस्वामी शब्द जातिवाचक है, लेकिन प्रसिद्ध कवि तुलसीदास का विशेषण होने के कारण यह व्यक्तिवाचक बन गया है । अथवा निराला (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) महान कवि थे। नेहरू जी (जवाहर लाल नेहरू), शास्त्री जी (लालबहादुर शास्त्री) आदि ।

(ग) कभी-कभी भाववाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा भी बन जाती है।
जैसे :- भारत की सुन्दरता जा रही है। यहाँ 'सुन्दरता' सुन्दर नारियों का द्योतक है।

संज्ञा के विकार (Inflections of Nouns)

संज्ञा एक विकारी शब्द है। इसका अर्थ हुआ कि संज्ञा में लिंग, वचन और कारक के अनुसार विकार अर्थात परिवर्तन होता है।

हम आशा करते हैं कि आपको 'संज्ञा किसे कहते हैं ' विषय पसंद आया होगा।














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