नेकी का फल

Neki ka fal,chinti or kabotar


एक बार एक मधुमक्खी अन्य मधुमक्खियों के झुण्ड के साथ उड़ती-उड़ती अचानक पानी में गिर पड़ी। मधुमक्खी के पंख पानी में भीग गए और वह उड़ने में असमर्थ हो गई। वह बेचारी पानी से निकलने के लिए तड़फने लगी। एक कबूतर मधुमक्खी को पानी में गिरते हुए देख रहा था। कबूतर के मन में दया का भाव उत्पन्न हुआ और उसने मधुमक्खी को बचाना चाहा।

तभी उसने मन ही मन योजना बनाई और एक पत्ता लाकर पानी में फेंक दिया । मधुमक्खी उस पत्ते के ऊपर चढ़ गई और पंखो के सूखते ही उड़कर उसने अपनी जान बचा ली।

कुछ ही दिनों के उपरान्त एक शिकारी बन्दूक से कबूतरों का शिकार कर रहा था। अचानक वह मधुमक्खी उस और आई तो देखा कि शिकारी की बन्दूक का निशाना वाही कबूतर था जिसने उसकी जान बचाई थी। मधुमक्खी ने एक पल भी देर किए बिना शिकारी के हाथ पर डंक मार दिया। शिकारी का निशाना चूक गया और उसका वार खाली गया । इस प्रकार मधुमक्खी ने अपनी जान बचाने वाले की जान बचाकर भले का बदला भलाई से ही दिया ।

शिक्षा - अन्त में भला करने वालों का भता ही होता है ।


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