गुप्त खजाना

 



किसी गांव में एक बूढ़ा किसान रहता था। वह बड़ा बुद्धिमान था, लेकिन उसके पुत्र बड़े आलसी और निकम्मे थे । वह बहुत उदास रहता था । एक दिन वह बीमार पड़ गया।

उसने अपने पुत्रों को बुला कर कहा-"बेटों, अब मैं तुम से जुदा हो रहा हूँ। मैंने तुम्हारे लिए खेत में गुप्त खज़ाना दबा रखा है। उसे खोदकर आपस में बांट लेना ।"

कुछ दिन के बाद किसान की मृत्यु हो गयी । पिता के कहने के अनुसार पुत्रों ने खेत को खूब खोदा, लेकिन उन्हें कुछ न मिला ।

अब की बार उन्होंने खेत को गहराई के साथ खोदा, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा। वे निराश हो गये । उधर वर्षा ऋतु आ गई और बुआई होने लगी। उन्होंने भी बुआई की।

उनके खेत में सबसे अधिक फसल हुई, क्योंकि उन्होंने खेत की अधिक खुदाई की थी। अनाज से उनका घर भर गया । वे बहुत खुश हुए और माँ से कहने लगे-पिता जी के वचन सच निकले । खेत में अनाज के रूप में खज़ाना दबा हुआ था जिसे हम समझ न सके । अब हम आलस छोड़कर खूब मेहनत करेंगे।"

शिक्षा-पुरुषार्थ से काम सिद्ध होते हैं ।



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